यूँ ना खेला करो दिल के ज़ज्बात से .
जिंदगी थक गयी ऐसे हालात से .
रोज़ मिलते रहे सिर्फ मिलते रहे .
अब तो जी भर गया इस मुलाक़ात से .
ख्वाब में आता हँसता लिपटता सनम .
हो गई आशनाई हमें रात से .
गा रहा था ये दिल हंस रही थी नज़र .
क्या पता आँख भर आई किस बात से .
फन को मापतपुरी पूछता कौन है .
पूछे जाते यहाँ लोग अवकात से .
गीतकार -सतीश मापतपुरी
मोबाइल -9334414611
बुधवार, 5 मई 2010
मंगलवार, 4 मई 2010
अपनी निजी कारणों से मैं नेट से ज़रा दूर रहा , इसके लिए मैं सबसे माफ़ी मांग रहा हूँ . अब मैं लौट आया हूँ .
अपनी निजी कारणों से मैं नेट से ज़रा दूर रहा , इसके लिए मैं सबसे माफ़ी मांग रहा हूँ . अब मैं लौट आया हूँ .
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