भूलना मत दीन और ईमान को.
या खुदा दे अक्ल हम इन्सान को.
अमन से सुन्दर है कुछ दूजा नहीं.
प्रेम से बढ़कर कोई पूजा नहीं.
बांटना क्या राम और रहमान को.
या खुदा दे अक्ल हम इन्सान को.
प्यार और खुशियाँ ही बसती थी जहाँ.
हिन्द वो इकबाल का खोया कहाँ.
किसने जख्मी कर दिया मुस्कान को.
या खुदा दे अक्ल हम इन्सान को.
स्वार्थ से हरगिज़ ना तौलो प्यार को.
दुःख मे पुरी बदलो ना व्यवहार को.
थाम लो तुम गिर रहे इंसान को.
या खुदा दे अक्ल हम इन्सान को.
गीतकार - सतीश मापतपुरी
मोबाइल - 9334414611
बुधवार, 29 सितंबर 2010
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