बुधवार, 23 जून 2010
महाभारत- सार
राजा और दरबार की, परलोक की-संसार की.गाथा है भगवान् और इंसान के व्यवहार की.शाप की-अभिशाप की, अनुराग की-वैराग की.घात की-आघात की, कहीं छल- कपट-प्रतिघात की.मिलन की-वियोग की, दुर्योग की- संयोग की.नीति की-कुनीति की, कहीं रीति की- राजनीति की.बात ये आचार की, विचार की- संस्कार की.गाथा है भगवान् और इंसान के व्यवहार की.ज़िन्दगी की- काल की, कहीं भूत की- बेताल की.शास्त्र की- शास्त्रार्थ की, कहीं जादुई ब्रम्हास्त्र की.नाथ की- अनाथ की, कहीं बात की- बेबात की.अर्थ की- अनर्थ की, कहीं स्वार्थ की- परमार्थ की.यह कहानी कुलबधु के लाज की- चीत्कार की.गाथा है भगवान् और इंसान के व्यवहार की.जीत की- कहीं हार की,कहीं हक - कहीं अधिकार की.मान की- अपमान की, कहीं शान और स्वाभिमान की.झूठ की- कहीं सत्य की, कहीं भक्ति की- कहीं शक्ति की.कहीं मित्रता में त्याग की, कहीं जननी के दुर्भाग्य की.लोभ की- कहीं क्षोभ की, कहीं दंड की- पुरस्कार की.गाथा है भगवान् और इंसान के व्यवहार की.गीतकार- सतीश मापतपुरीमोबाइल- 9334414611
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