लड़का - आज तुम्हारा गोरा बदन गोरी कर देंगे हम लाल , ये है होली का मस्त धमाल ।
लड़की - दूर से ही रंग डालो संवरिया समझ रही तेरी चाल ,गलेगी नहीं यहाँ तेरी दाल ।
लड़का - आज नहीं छोड़ेंगे तुमको भले ही दोगी गारी , चाहे भींगेगी तेरी चोली -चाहे भींगे सारी।
लड़की - प्यार में तेरे तन -मन पहले ही रंग डाला , उस पे दूजा रंग चढ़े क्या प्यार जिसे रंग डाला ।
लड़का - करो ना कोई आज बहाना -फेंको ना कोई जाल , ये है होली का मस्त धमाल ।
लड़की -रंग डाला है अंग -अंग सजना बंद करो अब होली ,भींग गई मेरी धानी चुनरिया भींगी रेशमी चोली ।
लड़का - खुल के खेलो फाग सजनिया -काहे तू घबराये ,चाँद से मुखड़े पर ये जुल्फें नाहक ही बिखराए ।
लड़की - दूर से ही मारो पिचकारी -छू मत गोरे गाल ,गलेगी नहीं यहाँ तेरी दाल ।
लड़का - पिचकारी का रंग रंग रंगीलों जाति-धर्म ना माने ,चुन -चुन कर एक -एक को रंग दे उंच -नीच ना माने ।
लड़की - बरसा है रंगों का सावन -धरती के आँगन में ,अब ना होगा कांटा-होगा गुल ही गुल गुलशन में ।
लड़का - मैल दिलों का धुल जाते हैं -होते सब खुशहाल , ये है होली का मस्त धमाल ।
होली मुबारक
गीतकार -सतीश मापतपुरी
शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010
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