नारी -- पिया फगुआ में हमके गढ़ा द हंसुली ।
मर्द -- हंसुली का चीज धनिया -हंसुली का चीज ह ,गोरिया अंगे -अंग तोहरा लगा देब बिजुली ।
नारी -- पिछले फगुनवा में टारी देहल कहिके , बड़की चिढावे रोज हंसुली पहिन के ।
मुहंवा दबाईके हँसेले मंझली -पिया फगुआ में हमके गढ़ा द हंसुली ।
मर्द --दिल जनि तोड़ धनिया मार जनि ताना ,फगुआ में रूठे बदे खोज ना बहाना ।
हंस द ठठाई के गढ़ा देब हंसुली ,गोरिया अंगे -अंग तोहरा लगा देब बिजुली ।
नारी -- हंसुली गढ़ा द पिया चुनरी रंगा द ,अंचरा में सलमा -सितारा जड़वा द ।
मीना बजार से मंगा द टिकुली ,पिया फगुआ में हमके गढ़ा द हंसुली
मर्द -- अंगुठा लगवाल धनिया कागज पे लिखाल,सोनरा बोलाके अबे हंसुली गढ़ाल ।
चुनरी रंगाईदेब लिया देब टिकुली , गोरिया अंगे -अंग तोहरा लगा देब बिजुली ।
होली मुबारक
गीतकार - सतीश मापतपुरी
मोबाइल -9334414611
गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें