शनिवार, 20 मार्च 2010

बिकास -गीत (बिहार -दिवस पर विशेष )

बहेला बिकास के बयरिया - बिहंस उठल खेतवा -बधरिया.
अब ना बिहार आपन केहू के मोहताज बा , ना जाइब बहरा अब एहिजे काम -काज बा .
दुसरो के भर देब अंजुरिया- बिहंस उठल खेतवा -बधरिया.
खेतवा में लहरेला धनवा के बलिया , अब ना मुआर होई गेहुँवा -मसुरिया .
खेते -खेते टिउबेल-नहरिया - बिहंस उठल खेतवा -बधरिया.
धनिया कहेले एजी सुनी हमार बतिया , अब इस्कूल जाई हमरो परबतिया .
नाहीं माजी घर में लोटा -थरिया -बिहंस उठल खेतवा -बधरिया.
अब का फिकिर गोरी भाग चड़चड़आइल ,गाँव से शहर तक सड़क पिटाइल.
फसल बेचब हटिया -बजरिया -बिहंस उठल खेतवा -बधरिया .
अपना लेखा बचवन के हम ना बनाइब,पुरी हम ना पढ़ली बाकिर उनके पढ़ाइब .
उहो करिहन हाकिम बन नोकरिया -बिहंस उठल खेतवा -बधरिया .
गीतकार - सतीश मापतपुरी
मोबाइल -09334414611

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